sadkon par dahsat ka manjar by mudit sand


सड़को का मंजर देखोगे 
दिल टूटेगा, तुम रोओगे। 
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सड़को पर दहशत का मंजर 
जब नजर तलक आ जायेगा 
कभी शीशा गिरते देखे हो 
दिल वैसे बिखरता जायेगा। 

यहाँ मौसम को बेचैनी है 
आदम भी आग उगलते है 
प्यासे की पीड़ा देखे हो  
तड़प तड़प मर जायेगा। 

यहाँ मोहब्बत के चर्चे 
केवल किताबी बातें हैं
कभी दिल लगाके देखे हो
दिल पागल ही हो जायेगा। 

यहाँ चेहरे नजर को आते हैं 
इंसान नजर में नहीं आता 
नकाब पहन कर देखे हो 
दिल पत्थर सा बन जायेगा। 


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