हाथ फैलाये वो मेरी दहलीज़ पर आया

हाथ फैलाये वो मेरी दहलीज़ पर आया 
सर पर मैंने भी रख दिया प्यार का साया 
लेकिन सियासत की भूख तो नफरतों से मिटती है 
उसको मेरा सलीके से बात करना रास नहीं आया। 

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