ghazal

किनारों को छूने वो लहर आ रही है 
यह क्या हुवा वो तो फिर जा रही है 
थोड़ी देर रूकती तो कुछ बात भी करते 
हाथ मिलाया था, हम गले भी तो मिलते 

किस्मत के नखरे अब सहे नहीं जाते 
मेहनत पर मेरी वो पर्दा कर रही है 
मेरी जिंदगानी में कहानी कहाँ है 
मुझको नहीं मालूम कुछ कहानी यही है। 

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