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Kisi mod pe

किसी मोड़ पे ……… किसी मोड़ पे ……… किसी मोड़ पे संग खड़े थे, एक वक्त था सब खड़े थे, वहीँ मोड़ हे सुना - सुना , आज अकेले हम खड़े थे।   कुछ किस्से तो सुने सुने थे, कुछ हमने भी तर्क रखे थे, कुछ जेहन में देश बसा था , कुछ आँखों में स्वप्न सजा था।   एक वक्त जो हमने देखा , कुछ अपनों के सपने टूटे , कुछ अपनों को मिली मंजिल हैं, हाँ उनमे  से कुछ टूटे सपने ,भी तो लेकिन अपने ही थे।   झकझोरा बाहर से किसी ने , क्या अंदर से वो भी अपने थे , वही वक्त था पता चला की , कुछ हमको लेकर अपने थे , कुछ अपनों को लेकर अपने थे।  किसी मोड़ पे .............. -Mudit sand

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