इतना आसान तो नहीं हैं मुझे भुला देना

इतना आसान तो नहीं हैं मुझे भुला देना 
छुपाओ खूब तुम मगर मुझे मालूम है 
वो अंगुलियाँ जिन्हे फेर देते थे 
तुम अक्सर मेरे चेहरे पर 
वो सवाल तो करती है, करती हैं ना?
पूछती होगी की वो घनी घटायें कहाँ है 
जिसके खातिर हम पाँचो आपस में लड़कर 
फिर उस हाथ की पाँचों से भी लड़ते थे 
उन काली घटाओं के पीछे छुपा हुवा 
नूरानी हाये वो मखमली चेहरा कहाँ है 
जिसपर ठहरने का मन भी करता था 
और गाल पर धीरे धीरे सरकने का मन भी होता था 
ताकि अच्छी तरह सहला सके,
बताओ वो मुस्कान कहाँ गायब हो गयी 
जिन्हे देखकर तुम्हारे चेहरे पर भी हंसी आती थी 
वो नजरें कहाँ गायब हो गयी 
जो तुम्हारे अधरों पर अंगुली देख कर झुक जाती थी 
हाये कितने सलीके से शर्माती थी 
बता भी दो तुम जिसके बगैर गुजारा गया 
एक एक लम्हा, लम्हा नहीं साल था 
उसके बगैर अब कितने साल गुजारे जाओगे 
बता भी दो की कब उसके हाथों की अँगुलिया 
फिर से हमें थामेगी और हम मिलकर रेत पर 
ठहरो इस बार रेत पर नहीं 
पत्थर पर दिल बनायेंगे ताकि 
कोई उस पर मिट्टी बिखेर भी दे तो 
वो दिल नहीं बिखरे।  

Comments

Popular Posts