muktak

इज़हार इकरार और बाद में आँसू 
प्यार में पगले यह सब मिलेगा 
साँप सीढ़ी जैसा खेल ही तो है इश्क़ 
निन्यानवें पे यहाँ बेवफाई काट लेती है। 


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तुम मुझे प्यार करते थे 
तुम मुझे प्यार नहीं करते हो 
एहसासों को ख़त्म करने में लगे हो 
क्या खुद पर भी कभी ऐतबार करते हो। 

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हमारे बगैर खुश हो यह झूठी बात है 
दिल के तुम्हारे भी मेरे जैसे ही हालात हैं 
ख़्वाबों की दुनिया मैं हम घूम कर आये  
क्या तुमको अभी भी वो रात याद है।  

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