muktak



काली काली घनी घटायें 
ये जुल्फें नहीं है जादू है 
लहराता देखा इनको जिसने 
उनका दिल बेकाबू है। 

रात हो गयी घर को लौटो 
वक़्त पर किसका काबू है 


नदियाँ झरने और समंदर सब बहते हैं बहने दो 
लेकिन उनके आँख के मोती उनका थोड़ा ध्यान रखो तुम। 

प्यार करने आयी हो, अच्छी बात है बैठो तुम 
सुनो एक बात बताओ क्या तुमको प्यार करना आता है। 

मेरा दिल चुरा लेना पर पहले बता देना 









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