ghazal aayi

मेरी मोहबत कल मुझसे मिलने क्यों नहीं आयी 
बस तुम इंतज़ार किया करो तुम्ही छोर कर आयी। 

यूँ देखा उसने मुझे जैसे कभी नहीं देखा 
देखो देखो हाय वो क़ातिल कैसे शरमायी। 

रहा उससे भी नही जाता, रहा मुझसे भी नहीं जाता 
जिस दिन में न मिलने गया वो मिरे घर चली आयी। 

मोहब्बत और अक्ल का कोई तो रिश्ता होगा 'मुदित'
दिल में जब वो आई, दिमाग में भी वही आयी। 

सरकारों की क्या गलती जो तुम्हारा ये हाल है 'मुदित'
आज तक वो तो कभी भी कुछ करने नहीं आयी।  

किनारों का तो क्या ही वजूद रहा होगा 
समंदर की लहरें जब गाँवों तक चली आयी। 

मुझे प्यार करना इतना आसान तो न था 
जिद थी तुम्हारी जो इम्तिहान पास कर आयी। 

बड़ा मुश्किल था इश्क़ उस ज़माने में 
वो होली के बहाने फिर रंग लगाने आयी। 

सलीका भूल जाते हैं मोहब्बत में आशिक़ प्यार करने का 
उसको याद रही ये बात और वो सलीके से चली आयी। 

जाने कितने शहरों से होकर गुजरते है हम हर दिन 
आज इस शहर में चमेली वाले फूलों की महक आयी। 

अनजान चेहरे कितने गुजरते होंगे रोज उसके घर के आगे से 
जब हम आये तो वो हमें देख के हाँ बस हमें देख के मुस्कुरायी। 


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