Muktak
सागर की किस्मत देखो
बहकर नदी आ जाती है
वो बाँहें फैलाये बैठा है
वो भीतर में समाती है।
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मेरी खामोशी देख कर उससे रहा न गया और पूछ बैठी
आजकल इतना गुमसुम क्यों रहने लगे हो?
मेने भी फिर बता ही दिया उसको की मुझे प्यार हो गया है,
वो झूम उठी और हँसते हुवे बोली की पहले बता देते
बीमारी बड़ी है डॉक्टर भी बड़ा लगेगा इसमें ,
मैंने भी कह दिया की लाइलाज रोग है इश्क़
इसमें दवा नहीं लगती दारू लगती है,
सब इंतज़ाम कर देंगे एक बार उसका नाम तो बताओ
उसके इतना पूछते ही मैं फिर से खामोश हो गया
क्या इतना शर्माना अब गया वो जमाना चल बता,
मैंने भी सोचा बता देता हूँ, बस इतना कहा 'तुम'
उसने सुना पर कुछ न कहा
मेरी खामोशी से भी ज्यादा गहराई थी उसकी ख़ामोशी में।
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