saaki ghazal
यूँ बातें न बनाओ साकी
तुम प्याला भरते जाओ साकी।
गम तो सब देते हैं आजकल
तुम इक जाम पिलाओ साकी।
हम रूठे हैं या तुम रूठे हो
छोरो! हमें ना बतलाओ साकी।
इतने समय का साथ है
अब तो यूँ ही पिलाओ साकी।
हम जानते हैं तहजीब क्या है यहाँ की
हमको चलना न सिखाओ साकी।
कोई नहीं टोकता हमें
तुम पीना न सिखाओ साकी।
नहीं जानते तुम की हम कौन है
तुम अपने घर को जाओ साकी।
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