kya tum deep jalaogi

अरसे से वीरान रहा है दिल मेरा 
कब से ही सुनसान रहा है दिल मेरा 
अब न आना वरना तुम फस जाओगी 
मकड़ी वाला जाल रहा है दिल मेरा 
. . 

वीरान दिल से दिल लगाकर क्या तुम खुश रह पाओगी 
सोच लेना अगर चली गयी तो फिर वापस नही आओगी 
सारी दुनिया कतराती है जिस जगह पर जाने से
उस अंधियारे कोने में रहकर, क्या तुम दीप जलाओगी?

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