yaadon ka gullak
यादों का गुल्लक
यादों से भरा गुल्लक हाथों से छुट जाता है
नाजुक दिल है यह अक्सर टूट जाता है।
थोड़ी देर पहले वफ़ा थे वह बेवफा हैं अब
प्यारी प्यारी बातों पे वह रूठ जाता है।
मेरे हाथों में जो हाथ था अभी, कहाँ गया
कईं जनमो का बंधन फिसल कर छुट जाता है।
नजर लग गयी जिसकी कहीं नजर नहीं आता
घण्टों निहारता था तब अब ऊब जाता है।
में रोऊँ तो न पूछना तुम की क्यूँ रोती हो
आँसू था किनारे पर और बाँध टूट जाता है।
इक मासूम सी कली की इतनी सी कहानी है
मचलती है वो खिलने को फिर सूरज डूब जाता है।
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