Paro ki shayari-2


पारो!
ऐसा ना कहो की
 तुम्हे मैं याद नहीं करता 
बहुत याद आती है 
पारो!
अब में मोर जैसा नाच करता हूँ
बन के बादल बरसात करता हूँ 
में तुम्हे बहुत याद करता हूँ 
पारो!... 

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पारो!
हवा में गोते लगाती हुई 
पानी की बूंदो की तरह बनो 
आसमाँ की तरफ कदम बढ़ाओ 
फिर खुद को समेट कर बादल बन जाना 
और जब तुम बरसोगी तो 
मुझे मिल पाओगी। 
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