shayari


रात भर खवाबों में जिसको साथ देखते हैं 
शहर की सड़कों पर उसकी बारात देखते हैं। 

तुम सामने खड़ी रही सूरज निकल गया 
हम निहारते रहे और सूरज ढल गया। 



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