hothon ko mire pukare
नदियों के किनारे
मिट्टी के सहारे
बने प्यार के घरोंदे
फिर प्यार जीने को
इक घूंट पीने को
होंठों को मिरे पुकारे।
अँखियों के किनारे
पलकों के सहारे
उलझी हुयी हैं जुल्फें
यह ख्वाब जीने को
इक घूंट पीने को
होंठों को मिरे पुकारे।
हवाओं के इशारे
तेरा चहरा निहारें
गालों की वो लाली
यह शाम जीने को
इक घूंट पीने को
होंठों को मिरे पुकारे।
-Mudit sand
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