Shayari

प्यार के मारे आशिक को भला नींद कहाँ से आयेगी
प्यार की भूखी पारो को क्या रोटी दिल से भायेगी
तुम बंशी को अधरों पर यूँ रखकर आँखें मुँदोगे
प्यार मे पागल पारो भी तो प्यार के नगमे गायेगी।

मत पुछो 
मुझसे मेरा हाल 
तुम बतलाओ
सुख-चैन से सोते हो 
या फिर कमरे के 
इक कोने मे 
रोज रात को
सुबक सुबक कर
रोते हो।


यह मत सोचो गूंगे बहरे भला गीत कहाँ से गायेंगे
प्यार की ताकत ऐसी है दिल दिल से बतलायेंगे।



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