band aankhone pe hansta chehra

बंद आँखों पे हँसता चेहरा 
फिर कोई आया ख्वाब सुनहरा। 

बगिया का वो आम कह रहा 
उस पे है माली का पहरा। 

कितनी मुश्किल का मारा ठहरा 
जाने कब होगा नया सवेरा। 

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अधूरे ख्वाब अधूरा इश्क़ और अधूरे हम-तुम है 
कभी कभी तो लगता है, जवानी है पर कुछ कम है। 

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