bhool jate hain
अक्सर बिखर कर गिरते है उन्हें हम उठाना भूल जाते हैं
जो दिल टूटते है प्यार में वो दिल, दिल लगाना भूल जाते हैं।
मैं अक्सर देर से जाता हूँ मिलने, यह सोचकर की वो इंतज़ार करेगा
इंतज़ार में करता हूँ दिन भर उसका, मगर वह है की आना भूल जाते हैं।
बच्चों के हँसते खिलते चेहरे देखता रहता है वो आम का पेड़
जाने कितने पत्थर मारे थे लेकिन वो सारी गिनती भूल जाते हैं।
धुप से खफा हो तो रहो वो बिचारी क्या करे
हम कपडे से मुँह ढक लेते हैं जब छाता भूल जाते हैं।
रोटियॉँ जला देते हैं चूल्हे पर की चलो कम खायेंगे
इधर जान-बूझ कर दाल पकाना भूल जाते हैं।
सुई से लिपट कर रहा है धागा, वर्षों वर्षों तक, मगर अब कौन सिये
निशानी जो रह गयी थी यहाँ वह कहाँ रखी है हम रखकर भूल जाते हैं।
जमीं पर टूट कर गिरते हैं जो फूल आजकल पैरों से रौंदे जाते हैं
यह कैसा जमाना है यहाँ प्यार करने वाले गुलाब लाना भूल जाते हैं।
जो साथ में बैठकर महफ़िल सजाया करते थे, आज हमें अनजान कहते हैं
यह मुफलिसी का सबब है, हमें पता हैं यारों पर हम फिर भी भूल जाते हैं।
जब से तुम आये हो शहर में, सबकी नजर में हो 'मुदित'
दिल जो दिल चुराते थे वो अब दिल चुराना भूल जाते हैं।
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