Hindustaan dekha hai..


मेने खुली आँखों से 
खुले आसमाँ के नीचे 
 धुप के साये में 
भूखे पेट, नँगे पाँव 
जलता इंसान देखा है। 
मेने आँसू की धारा को
नदी का नीर जान 
प्यास बुझाने की कोशिश में 
उझड़े हुवे सपने लिए
चलता इक कब्रिस्तान देखा है। 
मेने वर्तमान को कन्धों पर  
बचपन का अक्स लिये 
अपने भविष्य से अनजान
हाथों में गठरी थामे 
सड़कों पर हिन्दुस्तान देखा है। 


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