shayari

मुकद्दर साथ दे न दे मोहब्बत साथ देती है 
बहुत गहरी लगी खाई की वो अपना हाथ देती है। 

दरवाजे की चौखट पर आहट तेरे कदमो की सुनाई देती है
यह तस्वीर अब केवल ख्वाबों में दिखाई देती है। 



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