Shayari
कम लिखते है पर इतना भी कम नही लिखते
प्यार को प्यार लिखते हैं हम गम नही लिखते।
सूरज बहूत प्यार जता रहा है हम पर
कुछ ज्यादा ही धूप बरसा रहे हम पर।
जो कह रहा था की कल मिलने आएगा
नहीं मालूम मुझे की कब मिलने आएगा।
एक कहानी लिखते रहे पर अधूरी रही
अपनी जिंदगानी लिखते रहे पर अधूरी रही।
बिखरती स्याही
आज मन उदास था फिर भी कलम उठाई की जो कुछ शब्द बन पड़े लिख डालता हूँ,
मगर ज्यों ही स्याही कलम से निकल कर कागज पर गिरती है त्यों ही मेरे आँख से निकलकर गालों पर लुढ़कता हुवा आँसू का कतरा जा के गिरता है स्याही पर और दोनों कागज पर बिखर जाते हैं बिलकुल मेरी और तुम्हारी तरह।
Comments
Post a Comment