paro ki shayari

पारो! 
तुम ना डरना 
लड़ना पड़े खुदा से
तो तुम लड़ना पारो!
तुम ना डरना
तुम प्यार करना 
तुम प्यार करना
कुछ जाहिल लोग कोशिश करेंगे 
तुम्हारे कदमों को जकड लेने की 
मगर तुम न थमना 
तुम बह जाना 
तुम ना डरना पारो!
तुम प्यार करना 
तुम प्यार करना 
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पारो!
तुम चुप ना रहना 
दो कहे तो चार कहना 
तुम कहना हाँ
हर बार कहना 
तुम ना सहना पारो!
तुम चुप ना रहना

पारो!
तुम्हारे हाथों में जो घाव है 
कहीं तो चोट की होगी 
कहीं सड़क के पत्थर पे 
या फिर पैड़ की डाली से 
नहीं तो फिर कुछ राज़ है 
जो कमरे में बिखरे कांच है। 




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