unkahi shayari

मैं हँसना भी चाहता हूँ, मैं रोना भी चाहता हूँ 
तुम्हारे जाने के बाद यादें संजोना चाहता हूँ। 


हाथ मिलाकर रूह को छूना मार देता है 
धडक़ते दिल को निगाहों से थाम लेता है 
पहले पहले प्यार का मारा 
कब कहाँ कैसे सलीके से काम लेता है। 

हाथ से हाथ मिला 
हाये! मैं मर गया 
पहली पहली बार मैं 
पहला पहला प्यार 
मुकम्मल हो गया 
हाये! मैं मर गया। 

जिस रूह पर बीत चुकी है 
तन्हा रातों की घोर वीरानी 
फिर से कैसे उस बगिया में 
वो बन फूल खिल पायेगा। 


हँसना रोना पाना खोना सब प्यार में होता है 



तुमको खो दिया तो रो दिया
बस इतनी सी बात कोई बडी बात नही।

तस्वीरों में देखता हूँ आजकल
तुम पास हो या फिर पास नही।

में हँसता हूँ तुम्हारी यादों को याद कर करके
तुम जो कहती थी चाचा हप अब खैर कोई बात नही।

अक्स कागज पर उकेरने की कोशिश और कलम घिस गयी 
अरसा हो गया उसका चेहरा देखे अब तो यादें भी मिट गयी 
वक़्त पर जो आते रहे रेत के तूफान उन्होंने हमें नहीं बक्शा 
नजरों के सामने अँधेरा किया फिर एक तस्वीर उड़ गयी। 

ख्वाहिश है दिल में की 

अरमानों के पंख लगे 

सोच रहा हूँ एक दफा 

सपनों वाली दुनिया में

दुर-दुर तक उड़ता जाऊँ।


तुम नहीं हो साथ मगर 
यह खिलखिलाता गुलाब 
अक्सर सवाल करता है 
वो मेरे जैसा दिखने वाला 
किधर रहता है आजकल।

रोशनी कभी ठहरी ही नही 
फिर मुदित कहाँ दिखाई देता 


6/8/2020

बहुत अच्छी लगती हो तुम 
यह सच लिख दिया मेने 
किताब के आखिरी पन्ने पर 
वह मुकाम हासिल होने से पहले 
तुमसे यह बात छुपानी भी तो है। 

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