ham unse kuch bhi chhipate nhi hain

हम उनसे कुछ भी छिपाते नहीं है 
फिर भी शिकायत की बताते नहीं है। 

माथे पर शिकन की हकीकत बयां कर 
खामखां हम उनको सताते नहीं है। 

कमीज सिलवानी थी दीवाली पे उनकी  
अच्छा है बच्चे पटाखे जलाते नहीं हैं। 

कागज कलम सब दिलाते हैं उनको 
मजबूरियाँ हैं की खिलोने दिलाते नहीं हैं। 

मुफलिसी ने हमारे हाथ बाँध रखे हैं 
हम रोते हुवे को मनाते नहीं हैं। 

हम दूर से सितारे दिखाते हैं उनको 
वो कहते हैं 'मुदित' तोड़ कर लाते नहीं हैं। 

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