dost hamare tash ki gaddi

दोस्त हमारे ताश की गड़ी 
सब बिखर गए बाज़ार में 
ख़ुशी खुशी वो कहते हैं 
हम बिके हैं अच्छे भाव में 
में अकेला खड़ा खड़ा कुछ सोच रहा हूँ 
मैं क्या करता हूँ, मैं क्यों करता हूँ 
सच कहकर हर दिन मरता हूँ 
वहाँ झूठ के मायाजाल मैं। 

Comments

Popular Posts