tanhai rhi hai by mudit sand
जिंदगी में हमको मिला बस यही है
परछाई बन कर साथ तन्हाई रही है।
हाथों की लकीरे है इतनी अकेली
किस्मत भी हमारी हरजाई रही है।
बिस्तर पर अकेले नींद आती नहीं है
रात लम्बी है और आँखें सताती रही है।
प्यार में हम तुम दोनों ही थे शायद
तुम्हारी हंसी हमको रुलाती रही है।
मुश्किल में हम है और हम ही रहेंगे
वो तो अक्सर बातें भुलाती रही है।
मुद्दतों बाद मुनासिब नहीं होता मिलना
जाने वो कब से बहाने बनाती रही है।
गलती हमारी थी और माना है हमने
बेवफा हजारों को ये बताती रही है।
हकीकत बताते हैं हुवा बस यही है
हकीकत हमेशा से वो छुपाती रही है।
बहुत मुश्किल है मेरे लिए सब भूलाना
हमको तो हमेशा याद आती रही है।
मेरे पीछे वो गुल खिलाती रही है
मेरे सीने में आग जलाती रही है।
दिया जलाना था हम दोनों को मिलके
वो तो पहले से ही बाती चुराती रही है।
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