tumhari yaadein ab hawa ho gyi
छत पर अक्सर
मैं अकेला
खोया खोया सा
इधर-उधर
अपने चारों और
निहारता रहता हूँ
तभी महसूस होता है की
वो करीब आती है
मुझको छू लेती हैं
लेकिन जैसे ही
मैं छूने की कोशिश करता हूँ
वो चली जाती है,
ठहरना ही नहीं था उसे
क्या हवा का छूना
दिल का छूना है
अगर ऐसा है तो
तुम्हारी यादें कब से
हवा हो गयी।
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