woh raat kya raat thi
यह रात वाह क्या रात है, कोई निराली बात है
में यूँ अकेला हूँ मगर, धरा गगन के साथ है
चंदा अम्बर में हैं बैठे, अंखिया सितारे दुनिया देखे
अहा श्वेत श्रृंगार कहो इतना प्यार, कितना प्यार
जलधर दौड़े आते हैं, चंदा को तब छिपाते हैं
फुआरों संग गुनगुनाते हैं, इक सपना दिखाते हैं
चंदा मुस्कुराते हैं, बयार को आवाज लगाते हैं
हवा प्यारी तुम आओ ना, अपने रंग दिखाओ ना
बयार जो नटखट हे चंचल हे थोड़ी शरमाई
फिर बोली अभी आयी अभी आयी
मस्त मचल के आती हे, बह जाती हे
बहाती हे अपने संग इस बादल को
तब मुख पे से पर्दा हटता है, चंदा का नूर बरसता हे
चंदा कहते हे बादल से अब तू भी बरस अब तू भी बरस
यह रात वाह क्या रात है, कोई निराली बात है
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