परिंदे भुल जाते
गर रास्ता आसमानो में
तो क्या मन की पुकार
वहॉं पहुंच पाती होगी
इसी उम्मीद से
में इंतजार करता हुँ
हवा आती होगी
शायद बताती होगी।

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