Shehar jo mera ghar he

शहर जो मेरा घर है 
यहाँ कभी शाम है 
कभी सहर है 
टिक-टिक चलती है
घड़ियाँ यहाँ भी 
बताओ मुझे प्यारे 
कि कौनसी पहर है। 

शहर जो मेरा घर है 
यहाँ चिड़िआ चहकती है 
बगिया महकती है 
कहती है,सुनो ना 
ओ ! प्यारी बयार 
हम होंगे सवार 
कि चलती लहर है। 

शहर जो मेरा घर है 
यहाँ उड़ते बशर है 
अधर सारे तर है 
ऐसा असर है 
ख्वाबो के भी पर है 
खोलो ना अँखिया 
कि दिखता बहर है। 

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