वो चिंगारी सुलगाता हे फिर हवा भी देता हे
अमनो अमान को ख़ाक कर रखा हे उसने
मगर कहता हे की वो आग नहीं लगाता।

बहुत मासूम लोगो के क़त्लों से हाथ रंगे हे
इन सियासत के लोगों का मेरे दोस्त मगर
खून नहीं बताते कहते हे की कुंकुम लगाते हे।
-----------------------------
तेरी गुलामी करते करते कई रातें गुजार दी हमने मगर
सुबह इस कैद से आजाद होके भी आजाद नहीं होता।

तेरी बाँहों की क़ैद में इतना सुकून मिलता हे की
विश्वास ही नहीं होता खुदा जमीन पे ही जन्नत दिखता हे

मुझे तन्हा रहकर भी खाबों में बस तुझसे ही बातें करनी हे
नहीं करना और बहुत कुछ सिर्फ मुलाकातें करनी हे।
--------------------

इन हवाओं के डर से ही छीप बैठ गये तुम
हमने तो तुफानो से भी जंग बैखोफ कर ली।

तुम तो बौखला गये कुत्तों के आने भर से
हम तो शेर को अपनी दहाड़ से भगा आये।


Comments

Popular Posts