bhula diya

तुमने उसको चाहा मुझको भुला दिया
शाम हुवी और मुझको छिपा दिया।

ये जो चाँद हे जिसे देख देख इतरा रही हो
उसकी रौशनी के पीछे कोई और नहीं
में ही हूँ वो सूरज जिसको भुला दिया। 

Comments