muktak
में छीन लेता हूँ बेजिझक तुझसे तेरी सौग़ातें
तू भी मानती है की मेरी हर अमानत पे तेरा हक़ हे
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ये काली आँखे इतनी गहरी
अंदर राज समेटे इसने
सिर्फ पलकों का पहरा दिखता
और भी पहरे बीठते इसपे।
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निगाहें कितना कुछ छिप्पा रही हे
जुबां भी कुछ नहीं बता रही हे
तुम्हे तकलीफ हो तो जान जाता हूँ
मेरे दिल की धड़कन मुझे बता रही हे
मुझसे छिप्पा के मुझे खुश रखना चाहते हो
मगर मेरी सांसे ही मुझे तड़पा रही हे।
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हम दोनों पे काला साया
इक दुजे की छाया हे
अच्छा होगा दूर चले अब
न जाने किसकी माया हे।
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सुकून नहीं मिल पाया बिस्तर पे भी आज
जो ख्वाबो में भी सफर कर रहे उसी के साथ
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मेरे धैर्य का कब से इम्तिहान ले रहे हो
अब तो मेरे शरीर से प्राण ले रहे हो
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मेने कदम पीछे हटाए नहीं आज तक
और एक तू हे जो बढ़ाये ही नहीं आज तक
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मुझे इंतज़ार हे तेरी ज़िद हे
तुझे प्यार हे मेरी ज़िद हे
क्या हो रहा कुछ पता नहीं
मेरी ज़िंदगानी तेरी ज़िद हे
तेरी कहानी मेरी ज़िद हे।
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तुमको देखा उस पल जब से
हलचल हुयी हे दिल में अब से
कमरा बंद था न जाने कब से
अरमान जगे हे फिर से अब से
ऊपर देखा फिर पूछा नभ से
कितने दिन रुकोगी अब से
मन्नत मांगी कितनी रब से
संग रहे हम हर पल अब से
कितने घाव कुरेदे कब से
मर जायेंगे जो चली गयी अब से।
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कभी कभी तो ऐसा हे की पानी हे पर प्यास नहीं
कभी कभी तड़प उठती हे लेकिन अब वो पास नहीं।
बंद आँखों से कैसे देखूं उसको अपने ख्वाबो में
जिस पल खोली आँख मगर वो उस पल से ही गायब हे।
हमने तो बहुत चाहा की मुकमल हो ये इश्क़ तुम्हारा
जब करने वाले की ही रजा नहीं तो हमारी खता क्या हे।
दिन में चाँद रात में सूरज
न जाने किधर को जाते हे
मेरे पास जब तुम आती हो
हम खुद के भीतर खो जाते हे
तू भी मानती है की मेरी हर अमानत पे तेरा हक़ हे
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ये काली आँखे इतनी गहरी
अंदर राज समेटे इसने
सिर्फ पलकों का पहरा दिखता
और भी पहरे बीठते इसपे।
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निगाहें कितना कुछ छिप्पा रही हे
जुबां भी कुछ नहीं बता रही हे
तुम्हे तकलीफ हो तो जान जाता हूँ
मेरे दिल की धड़कन मुझे बता रही हे
मुझसे छिप्पा के मुझे खुश रखना चाहते हो
मगर मेरी सांसे ही मुझे तड़पा रही हे।
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हम दोनों पे काला साया
इक दुजे की छाया हे
अच्छा होगा दूर चले अब
न जाने किसकी माया हे।
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सुकून नहीं मिल पाया बिस्तर पे भी आज
जो ख्वाबो में भी सफर कर रहे उसी के साथ
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मेरे धैर्य का कब से इम्तिहान ले रहे हो
अब तो मेरे शरीर से प्राण ले रहे हो
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मेने कदम पीछे हटाए नहीं आज तक
और एक तू हे जो बढ़ाये ही नहीं आज तक
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मुझे इंतज़ार हे तेरी ज़िद हे
तुझे प्यार हे मेरी ज़िद हे
क्या हो रहा कुछ पता नहीं
मेरी ज़िंदगानी तेरी ज़िद हे
तेरी कहानी मेरी ज़िद हे।
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तुमको देखा उस पल जब से
हलचल हुयी हे दिल में अब से
कमरा बंद था न जाने कब से
अरमान जगे हे फिर से अब से
ऊपर देखा फिर पूछा नभ से
कितने दिन रुकोगी अब से
मन्नत मांगी कितनी रब से
संग रहे हम हर पल अब से
कितने घाव कुरेदे कब से
मर जायेंगे जो चली गयी अब से।
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कभी कभी तो ऐसा हे की पानी हे पर प्यास नहीं
कभी कभी तड़प उठती हे लेकिन अब वो पास नहीं।
बंद आँखों से कैसे देखूं उसको अपने ख्वाबो में
जिस पल खोली आँख मगर वो उस पल से ही गायब हे।
हमने तो बहुत चाहा की मुकमल हो ये इश्क़ तुम्हारा
जब करने वाले की ही रजा नहीं तो हमारी खता क्या हे।
दिन में चाँद रात में सूरज
न जाने किधर को जाते हे
मेरे पास जब तुम आती हो
हम खुद के भीतर खो जाते हे
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