Tere Julm

तेरे जुल्मो से परेशान  सताये
आंसुओ की नदी बहाये बैठे हे।

तेरी धमकियों से डरे डराए
खामोश बिन बताएं बैठे हैं।

तूने जो हस्न कर डाला वो
दोस्तों से भी छिपाय बैठे हैं।

तेरी दोस्ती बचाने की कोशिश में
कईं दोस्तों को रुस्वाए बैठे हैं।

तेरी जिद को संभालना चाहा
अब हाथों में घाव लगाए बैठे हैं।

तेरे जिस दिल से दिल लगाया
उस दिल से कटे कटाये बैठे हे।

तेरे चेहरे को देख खिल उठते थे
तेरेे चेहरे से नजर हटाए बैठे हैं।

-मुदित सांड 

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