Bantwara

केवल इस जमीं जायदाद का ही क्यों
दिलो के दर्द का भी तो बंटवारा हो।

ये जो चार भाई इस चौखट पे खेल रहे थे
बचपन की उन् यादों का भी बंटवारा हो।

बहन जो अपने हिस्से का भी भाई को देती थी
प्यारी सी उन सौगातो का भी बंटवारा हो।

तबियत ख़राब होने पे रातो को जगा करती थी
माँ की उन नींद जुदा रातो का भी बंटवारा हो।

पिता जिसने कुछ न होने पे भी सब कुछ दिलाया
उनकी संघर्ष भरी जिंदगानी का भी बंटवारा हो।



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