Kuch yaadein
कुछ यादें सहज आभास लिए
जब अम्बर के नीचे सोती हे
कुछ यादें एक विश्वास लिए
जब खड़ी सामने होती हे
कुछ यादें उस बैचैनी की
जब बातें उनसे होती हे
कुछ यादें मीठा सा दर्द लिए
जब दोस्त चिकोटी भरते हे
और उसकी बातें ही करते हे
कुछ यादें आँखों में चमक लिए
जब सपनो में आ जाती हे
कुछ यादें दिल पे वॉर लिए
जब आँखों से ओझल होती हे
कुछ यादें धीरज खो देती हे
और आँखें छुप छुप रो देती हे।।
जब अम्बर के नीचे सोती हे
कुछ यादें एक विश्वास लिए
जब खड़ी सामने होती हे
कुछ यादें उस बैचैनी की
जब बातें उनसे होती हे
कुछ यादें मीठा सा दर्द लिए
जब दोस्त चिकोटी भरते हे
और उसकी बातें ही करते हे
कुछ यादें आँखों में चमक लिए
जब सपनो में आ जाती हे
कुछ यादें दिल पे वॉर लिए
जब आँखों से ओझल होती हे
कुछ यादें धीरज खो देती हे
और आँखें छुप छुप रो देती हे।।
Comments
Post a Comment