Maloom nhi

हर पल ख्वाब दिखाती हे मोहबत
मोहबत हे या मदहोशी मालूम नहीं।

हर घडी आंसू बहाती हे मोहबत
मोहबत हे या रुखसती मालूम नहीं।

हर सांस तड़पाती हे मोहबत
मोहबत हे या बैचनी मालूम नहीं।

हर लम्हा मिटाती हे मोहबत
मोहबत हे या बर्बादी मालूम नहीं।

हर क्षण जलाती हे ये मोहबत
मोहबत हे या दोपहरी मालूम नहीं।

हर बार  चली जाती ये मोहबत
मोहबत हे या बेवफाई मालूम नहीं।

हर मौके पे छली जाती ये मोहबत
मोहबत हे या रुसवाई मालूम नहीं। 


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