hokar udas kabhi tum na aansu bahana by mudit sand

होकर उदास कभी तुम न आँसू बहाना 

गलती सजा माफ़ी सब मेरे नाम जाना। 


झुम जाना बारिश के मौसम में इस कदर कि 

फिसलो भी तो फिसलकर मेरी गोद में आना। 


सुनो माँझे से घायल कोई पंछी छत पर गिर जाए 

तो सब कुछ भूल कर तुम प्यार से मलहम लगाना। 


छाँव में जिस बरगद के नीचे प्रेमी जोड़े बैठते हैं 

उसके करीब तुम एक और बरगद लगाना। 


गम की राह  न चलने देना किसी दिलजले को 

मन भारी होगा, उसको अश्कों में डूबने से बचाना। 


दूरी कठिन है मगर मजबूरी है 'मुदित' की  

अपनी प्यास से कहना इंतज़ार करे मेरे होंठ का जाना 



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