छोटी छोटी बातों के चलते साथी सारे रूठ गए
जिन यारों संग सपने देखे, वो नयन के तारे टूट गए
अब अकेला खड़ा उखड़ा में देख रहा हूँ राहों को
जो रहते थे दायें-बायें वो कहीं आगे-पीछे छूट गए।
-Mudit
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