wo chali gyi to kya huva

वो चली गयी
वो चली गयी तो क्या हुवा 
जो आँखें खुशियाँ देती थी 
अब यादें आँसू दे जाएँगी। 
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हाथ की लकीरों से यूँ अनबन है मेरी 
पास रहती है वो मगर साथ देती नहीं 

कतरा कर रहा है कोशिश समंदर से अलग होने की 
दिल टूट भी जाता है मगर ये आँखें क्यूँ रोती  नहीं। 


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न पानी मेरी आँख में 
न कोई गम की बात है 
वो चली गयी तो क्या हुवा 
यादें तो अब भी साथ है। 

बाहों से बिछुड़ जाने में भी 
आखिर मेरा ही हाथ है 
साथ नहीं तो ना सही 
अहसास छुअन के पास हैं। 

एक नया कबूतर शाख पे 
ढूँढ रहा जिस फूल को 
पाकर भी वो ना पायेगा 
जो महक हमारे पास है। 






हाथ ही तो बिछुड़े है 
अहसास छुअन के पास हैं 
न कोई आँसू आँखों में 
न कोई गम की बात है 

वो नया कबूतर छत पे 

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