ek roj milkar ham unse kahenge

वो कुछ भी कहे 

हम उनसे यही कहेंगे 

यादों में सही पर मिलते रहेंगे 

पूछेंगे उनसे की जो देखे थे हमने  

अब क्या वो सपने केवल सपने रहेंगे

क्या सावन मिलेंगे कभी पुराने

कोयलिया फिर से गायेंगी गाने 

क्या बारिश की बूंदें नाचेगी छमछम 

और सजनी तुम्हारे वो नटखट बहाने 

क्या छूने को तब भी बेताबियाँ रहेगी 

और निगाहें तुम्हारी मेरे दिल से कहेगी 

हाथों में फिर से क्या वो हाथ होगा 

क्या दिल तुम्हारा फिर मेरे पास होगा 

वो कुछ भी कहे 

हम उनसे यही कहेंगे 

यादों में सही पर मिलते रहेंगे  ... 

-मुदित 


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