बारिश की मौसम में यारों भीग रहा है मन
यादों की छत वाला वो घर कच्चा भी तो है
नयन नीर भी धीरे धीरे पहुँच चूका है दिल तक
डर लगता है आखिर वो भी बच्चा ही तो है
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