Rishte

रिश्तों को धागों में मत लपेटो 
बल्कि खुला आसमान दो 
उड़ने दो उनको अपने अरमानों के साथ 
कोशिश करो की तुम भी साथ उड़ो 
यकीन मानो मजा आएगा ज़िन्दगी का 
क्योंकि डोर कितनी भी मजबूत हो 
अक्सर टूट ही जाती है 
लेकिन ये आसमाँ अनंत है 
और रिश्तो की गहराई भी 
दोनों में क्षितिज दिखता है, पर मिलता नहीं। 

-मुदित

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