mene jisko pyaar kiya tha
मेने जिसको प्यार किया था
तब उसने भी इकरार किया था
खैर अब रघुवंशी रीती नहीं है
वचन निभाना नीति नहीं है
फिर भी सोचता हूँ में की
याद आती होगी शायद या
फिर याद आ जाती होगी
जब कोई उन हाथों को पढ़कर
और उनसे एक चेहरा गढ़कर
नजरों के सामने रखता होगा
तभी शायद वो रेखाएं होकर हर्षित
उलास मनाती होगी की एक बार फिर
उन बालों को सेहलाएंगी जो कभी बन सेतु
एक रेखा के मध्य समाकर कुछ दूर तक संग चलते थे रेखाओं के भीतर ही भीतर जो खालीपन है शायद उसको भरते थे
तभी शायद चेहरे की इन रेखाओं को उन
रेखाओं का हरषाना नहीं भाया
क्योंकि इन अधरों को किसी ने
कई सालो से रसपान नहीं करवाया
अब कैसे उसमे जान भरेगी
चेहरे पे मुस्कान भरेगी
यह सारा हाहाकार हुवा होगा मस्तिष्क में उसके
फिर दिल तक आया होगा
जो शायद मेरे पास है ।
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