मन मेरी

मन मेरा कहता रहता है
यार तुम बहूत सरल हो
मगर यूँ ना रहना,
हाँ मे फिर कहता हूँ
यूँ ना रहना पछताओगे
यार तुम बहूत सरल हो
यह दूनिया बडी कुटिल है
यहाँ कूटनीति है, नीति नही है
राजनीति है, प्रीति नही है



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