हाथों का सरकना है, हाथों से पत्तों को अलग होना है शाखों से

हाथों का सरकना है, हाथों से
पत्तों को अलग होना है, शाखों से।

दरिया है वहाँ पानी का चले जाओ
ख्वाबों को चुराना है इन आँखो से।

सूरज नही सोखता हवा सोखती है
बहाना तो बहाना है कईं सालों से।

खिलोने होते तो खेलते बच्चे भी
यहाँ चूल्हा जलाना है, राखों से।

तलाश कर रही है दुनिया सारी
चंदा को छिपाना है उन रातों से।

मुश्किल में है तेरी मोहब्बत 'मुदित'
मोहब्बत को बचाना है इन जातों से।

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