tam ko bhagana hai

अंधेरा आज, अंधेरा कल
यह तो साथ पथिक हर पल
डरना नही फिर भी, चलते जाना है
नभ के रवि को साथ लेकर
चक्षुओं को सूर्य कहकर
तुमको अब नेत्रों से पर्दा हटाना है
तम को भगाना है, तम को भगाना है।

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