samay

काश समय थोड़ा ठहर जाता! काश यह कार्य हम समय रहते कर लेते! हर घडी समय को कोसने वाले बुद्धिजीवी अक्सर भूल जातें है की उस बिचारे को ठहरना आता ही नहीं वो तो तब भी बहता था, अभी भी बह रहा है और आगे भी रहेगा। समय न किसी के लिए अच्छा है और न ही किसी के लिए बुरा वह उदासीन है, वह फ़कीर से भी ज्यादा पहुंचा हुवा फ़कीर है, बिना झोला उठाये चल देता है। समय ने अपना चरित्र कभी नहीं बदला, उसका बहाव आज भी शुचिता बनाये रखा है, यह हम है जो निरंतर बदलते रहते है हम ही शायद ठहराव नहीं चाहते अपनी जिंदगी में, पुनः विचार करें ।
By Mudit sand

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