yehi khyal hamko satata hai

जिन निगाहों के साये में पलते रहे हम आज तक 

उनका हमारे सर पर से गुजर जाना रुलाता है 

और वो कितना खयाल रखते थे हमारा 

अब बस यही खयाल हमको सताता है। 

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