Tumne ye sab jo kaha hai mujhse by mudit sand

तुमने ये सब जो कहा है मुझसे, जरा सोचना 

इतना जलील तो कोई अपने दुश्मन को भी नहीं करता। 

उस रात जो हुवा था, हुवा था दोनों की मर्जी से 

इलज़ाम एक पर लगे ऐसा दिल तो नहीं करता। 

मैं मुस्कुरा देता हूँ, खामोशी से, तेरा नाम सुनकर के 

आदत पुरानी है मेरी की दर्द में रोया नहीं करता 

कुछ यार जो करीब थे तेरे भी, वो करीब हैं मेरे भी 

किसी एक के खातिर यारों को खोया नहीं करता। 

जाने कितनी रातें गुजर गयी हैं तेरे जाने के बाद

और वो नजारा चाँद अब चाँद की गोद में सोया नहीं करता। 

-मुदित 


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